Wednesday, 7 December 2011

एक इन्स्पक्टेर से फीकी मुलाकात


रंगमंच अभिनेताओं का माध्यम है लेकिन दर्शको  की भाड़ी भीड़ अक्सर निर्देशक के नाम से ही जुटती है या फिर जब नाटक से कोई फ़िल्मी हस्ती जुड़ा हो ।अनुभवी निर्देशको की प्रस्तुतियाँ अक्सर सराही जाती हैं ।इस नाते निर्देशक भी कोशिश में रहते हैं कि उनके नाटक की रचनात्मकता पर खूब तालियाँ मिले ।लेकिन कई बार कुछ बड़े निर्देशको की प्रस्तुतियाँ भी निराश करती है ।07 दिसंबर 2011 को दिल्ली के श्रीराम सेंटर में सतीश आनंद द्वारा निर्देशित नाटक ' एक इंस्पेक्टर से मुलाकात ' औसत से ऊपर नहीं रहा ।सतीश आनंद की यह प्रस्तुति जल्दबाजी में तैयार की गयी प्रस्तुति लगी ।मुख्यतः छह पात्रो पर आधारित इस नाटक की प्रस्तुति में कुछ अभिनेताओं का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा ।मंच पर बैक ग्राउॱड म्यूजिक  का संयोजन भी बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है। एक ही ऑडिटोरियम में रोज़ होती प्रस्तुति के दौरान सेट -निर्माण कार्य में मुश्किल होता है ,फिर यथार्थवादी नाटक में सेट -परिवर्तन की ज्यादा गुंजाइश नहीं होती ,लेकिन क्या सौ वर्ष पुरानी नाटक की पृष्ठभूमि को नया आयाम नहीं दिया जा सकता था ।सुरेन्द्र शर्मा और प्रतिमा शर्मा ने जे .बी .प्रिस्ले. के इस नाटक का रूपांतरण किया है ।लेकिन सिर्फ नाम परिवर्तन से रूपांतरण कितना समकालीन हो सकता है,इसे भी परखा जाना चाहिए ।
             1945 में पहली बार प्रस्तुत  जे .बी .प्रिस्ले.का यह नाटक (एन इंस्पेक्टर काल्स ) यथार्थवादी रंगमंच के दौर में खूब प्रसिद्ध हुआ ।बाद में इस नाटक पर फ़िल्म(1954 )और टी .वी.सीरियल का भी निर्माण किया।पिछले ६५-६६ वर्षों में इस नाटक की विश्व भर में कई रचनात्मक प्रस्तुतियाँ हुईं हैं ।1954 में गाय हेमिल्टन (guy hamilton ) द्वारा इस फ़िल्म को desmon devis  ने पटकथा में ढाला था ।80 मिनट की इस फ़िल्म में नाटक की रोचकता बरक़रार है ।इंस्पेक्टर की भूमिका में अलेस्टर सिम  ने ठीक ठाक भूमिका निभाई है ।यू टयूब पर इस फ़िल्म को देखा जा सकता है । 

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